हर इक साँस कि जैसे कोई मिस्रा होज़िन्दगी भी शा'इरी के जैसी काटी हैशौक़ तो शाइ'र बनने का था मुझ को परये मत पूछो नौकरी कैसी काटी है— Simar Gozra