बातों बातों में तू घबरा जाता है
इश्क़ करने में तेरा क्या जाता है
मैं तेरी हर बात मानूँ और तू
हर किसी की बातों में आ जाता है
रात को भी सो नहीं पाता हूँ मैं
तुझ को खो देने का डर खा जाता है
इतनी जो रौनक़ है मैं देखूँ ज़रा
इस गली से कौन आता जाता है
— Simar Gozra















