जो अपने हालात से मारा होता है
उस बंदे का ख़ुदा सहारा होता है
जिस कश्ती की पाल ही टूटी फूटी हो
उस कश्ती का कौन किनारा होता है
मुझ से बिछड़ोगे तो मैं ये देखूँगा
मेरे बा'द भी कौन तुम्हारा होता है
उस की इक तस्वीर पड़ी है बटुए में
जिस को देख के मेरा गुज़ारा होता है
— Simar Gozra















