हमारे बीच गर झगड़े रहेंगे
तो उस से फ़ासले बढ़ते रहेंगे
वो हम को देख के हँसता रहेगा
हम उस को देख के रोते रहेंगे
न है शौक़-ओ-तमन्ना कुछ भी फिर भी
हम उस की ग़ज़लों को पढ़ते रहेंगे
— Simar Gozra
तो उस से फ़ासले बढ़ते रहेंगे
वो हम को देख के हँसता रहेगा
हम उस को देख के रोते रहेंगे
न है शौक़-ओ-तमन्ना कुछ भी फिर भी
हम उस की ग़ज़लों को पढ़ते रहेंगे
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