"अच्छा लड़का"
मुझ को उस का होना है
ऐसा समझो रोना है
उस से ही मुहब्बत थी
उस को ये बताना था
उस से अब छुपाना है
वो जो इक समुंदर था
उस के और किनारे थे
मैं कि ऐसी कश्ती हूँ
जिस का वो किनारा था
जो भी उस पे मरते थे
सारे अच्छे लड़के थे
मैं भी अच्छा लड़का हूँ
मैं जो उस पे मरता था
मैं कि ऐसा क़िस्सा हूँ
उस को जो सुनाना था
शा'इरी ही करनी थी
इश्क़ तो बहाना था
उस को पा के समझा मैं
प्यार किस को कहते है
समझा सारे आशिक़ क्यूँ
उस के शहर रहते हैं
मैं जो उस के गलियों में
रात दिन भटकता था
लोग मुझ को पागल भी
ऐसे थोड़ी कहते हैं
माना मैं के पागल हूँ
पर मैं उन से अच्छा हूँ
वो जो उस पे मर कर भी
आँख और पे रखते हैं
प्यार प्यार करते जो
क्या वो सच में करते हैं
क़स
में खा के मरने की
क्या वो सच में मरते हैं
गर वो मेरी होती तो
उस को मैं बता देता
इश्क़ कैसे करते हैं
कैसे इस
में मरते हैं
गर किसी को मिल जाए
यारो उस को कह देना
ये 'सिमर' वो लड़का था
कल भी उस पे मरता था
अब भी उस पे मरता है















