दिलासे तू न दे अब और इस दिल कोमुयस्सर ही नहीं ये शे'र महफ़िल कोसिवा ग़म के मिला क्या मर्द को आख़िरमुहब्बत कब पहुँचती संग मंज़िल कोज़रूरत से ज़ियादा इश्क़ समझा थातभी तो था रखा दिल में मुख़ातिल को— Akash Kumar