ख़ुदा की मुझ पे ये रहमत रही माँ
तेरे पल्लू की सर पे छत रही माँ
यहाँ परदेस में आराम है पर
ज़रा सी नींद में दहशत रही माँ
मेरा बटुआ नहीं होता है ख़ाली
तेरी तस्वीर की बरकत रही माँ
तेरे आँचल के कोने में बँधी उस
अठन्नी की बड़ी क़ीमत रही माँ
— Satya Prakash Soni















