"मैं और तू समझते हैं"
खुली आँखों के सपनों का कोई जहाँ नहीं होता
पड़ा जो इश्क़ में, कभी रातों को वो नहीं सोता
तड़प क्या चीज़ है न उन को देख पाने की
कोई तन्हाइयों में डूब कर यूँ ही नहीं रोता
ये मैं और तू समझते हैं कि पाने की ख़ुशी क्या है
वो क्या जाने कभी जीवन में जो कुछ भी नहीं खोता
— Shashank Shekhar Pathak















