
जो तू नहीं तो कुछ नहीं मुझ को मुयस्सर लगता है
तू हो अगर तो मुझ को कतरा भी समुंदर लगता है
है हाल क्या क्या मैं कहूँ जब से गई हो छोड़कर
दिल भी नहीं लगता कहीं घर भी कहाँ घर लगता है
— Shashank Shekhar Pathak
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