बिछड़ कर मैं तुम सेे किधर जाऊँगीमुझे लगता है मैं बिखर जाऊँगीमैं मन्नत का धागा लिए हाथ मेंजिधर भी कहोगे उधर जाऊँगी— Dr Bhagyashree Joshi