jis ne teri yaad men sajde ki.e the KHaak parus ke qadmon ke nishaan paa.e ga.e aflaak par | जिस ने तेरी याद में सज्दे किए थे ख़ाक पर

  - Tahir Faraz

जिस ने तेरी याद में सज्दे किए थे ख़ाक पर
उस के क़दमों के निशाँ पाए गए अफ़्लाक पर

वाक़िआ' ये कुन-फ़काँ से भी बहुत पहले का है
इक बशर का नूर था क़िंदील में अफ़्लाक पर

दोस्तों की महफ़िलों से दूर हम होते गए
जैसे जैसे सिलवटें पड़ती गईं पोशाक पर

मख़मली होंटों पे बोसों की नमी ठहरी हुई
साँस उलझी ज़ुल्फ़ बिखरी सिलवटें पोशाक पर

पानियों की साज़िशों ने जब भँवर डाले 'फ़राज़'
तब्सिरा करते रहे सब डूबते तैराक पर

  - Tahir Faraz

Charagh Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Tahir Faraz

As you were reading Shayari by Tahir Faraz

Similar Writers

our suggestion based on Tahir Faraz

Similar Moods

As you were reading Charagh Shayari Shayari