koi haseen manzar aankhoñ se jab ojhal ho jaayega | कोई हसीं मंज़र आँखों से जब ओझल हो जाएगा

  - Tahir Faraz

कोई हसीं मंज़र आँखों से जब ओझल हो जाएगा
मुझ को पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा

पलकों पे उस की जले बुझेंगे जुगनू जब मिरी यादों के
कमरे में होंगी बरसातें घर जंगल हो जाएगा

जिस दिन उस की ज़ुल्फ़ें उस के शानों पर खुल जाएँगी
उस दिन शर्म से पानी पानी ख़ुद बादल हो जाएगा

जब भी वो पाकीज़ा दामन आ जाएगा हाथ मिरे
आँखों का ये मेला पानी गंगा-जल हो जाएगा

उस की यादें उस की बातें उस की वफ़ाएँ उस का प्यार
किस को ख़बर थी जीना मुश्किल एक इक पल हो जाएगा

मत घबरा ऐ प्यासे दरिया सूरज आने वाला है
बर्फ़ पहाड़ों से पिघली तो जल ही जल हो जाएगा

  - Tahir Faraz

Naqab Shayari

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