bijli jaane par bhi jo chillataa tha | बिजली जाने पर भी जो चिल्लाता था

  - Tanoj Dadhich

बिजली जाने पर भी जो चिल्लाता था
तेरे जाने पर वो क्यों ख़ामोश रहा ?

  - Tanoj Dadhich

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    इश्क़ अगर बढ़ता है तो फिर झगड़े भी तो बढ़ते हैं
    आमदनी जब बढ़ती है तो ख़र्चे भी तो बढ़ते हैं

    माना मंज़िल नहीं मिली है हमको लेकिन रोज़ाना
    एक क़दम उसकी जानिब हम आगे भी तो बढ़ते हैं
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    Tanoj Dadhich
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    तुम्हारे ख़त को जलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है
    ये दिल बाहर निकलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है

    तुम्हारा फ़ैसला है पास रुकना या नहीं रुकना
    मेरी क़िस्मत बदलने में ज़रा सा वक़्त बाकी है
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    Tanoj Dadhich
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    भूला नहीं हूँ आज भी हालात गाँव के
    हाँ, शहर आ गया हूँ मगर साथ गाँव के

    दुनिया में मेरा नाम जो रोशन हुआ अगर
    जलने लगेंगे बल्ब भी हर रात गाँव के
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    Tanoj Dadhich
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    मुझसे वादा करने वाले वादा करके भूल गए
    अच्छा ख़ासा पीतल था मैं सोना करके भूल गए
    Tanoj Dadhich
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    पास हमारे आकर वो शर्माती है
    तब जाकर के एक ग़ज़ल हो पाती है

    उसको छूना छोटा मोटा खेल नहीं
    गर्मी क्या सर्दी में लू लग जाती है
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    Tanoj Dadhich
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