bojh ye dil se utar jaata to achha hota | बोझ ये दिल से उतर जाता तो अच्छा होता

  - Haider Khan

बोझ ये दिल से उतर जाता तो अच्छा होता
जाते जाते उसे इक बार तो रोका होता

छोड़ कर आया उसे तो ये खुला है मुझ पर
साथ होता मैं अगर उस के तो तन्हा होता

सच नहीं है ये मगर सोचता रहता हूँ मैं
मैं ने ही चाहा नहीं वर्ना वो मेरा होता

थे फ़साने में कई और भी मुझ से क़िरदार
मैं न होता तो कोई और तमाशा होता

रात भर ज़ेहन में क्या क्या नहीं आता हैदर
काश ऐसा न हुआ होता कुछ ऐसा होता

  - Haider Khan

Mehndi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Haider Khan

As you were reading Shayari by Haider Khan

Similar Writers

our suggestion based on Haider Khan

Similar Moods

As you were reading Mehndi Shayari Shayari