तुम्हें हर जगह मैं उठाया बहुत

मुझे तुम ने हम-दम गिराया बहुत

इशारों–इशारों में जो कुछ कहा
वो बोला नहीं कुछ सुनाया बहुत

मिरे सामने अब न आया करो
मिरा दिल है तुम ने दुखाया बहुत

मैं भूका तो उस की मुहब्बत का था
वो क़स्दन ही खाना खिलाया बहुत

कभी जीते जी वो तो देखा नहीं
जो मरने पे आँसू बहाएा बहुत

कभी रिश्ते की बात मैं जो किया
मिरा चेहरा मुझ को दिखाया बहुत

— Umrez Ali Haider

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Manzil Shayari

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