हज़ारों दुख मगर उस का सहारा है मुझेकोई है जिस ने मुझ से बढ़ के जाना है मुझेमैं ख़ुद भी मरने को ही चल दिया था हार केन जाने किस तरह उस ने सँभाला है मुझे— Haresh Vanza