सुब्ह से शाम हो रंग में
झूमता दिल रहे भंग में
यार हो साथ में और क्या
ढोल हुड़दंग हो ब्यंग में
ज़ख़्म हर बह गया दिल खिला
खो गए खेलते रंग में
प्यार की इक चले यूँ हवा
ज़िंदगी ग़म ख़ुशी जंग में
दर्द का गीत गाओ हॅंसो
मौज हासिल करो ढंग में
— Vinod Ganeshpure















