ये ज़िहानत हैं मिरी ग़लती नहीं है
बिन पसीने ज़िंदगी फलती नहीं है
आप की पहचान भी इक है वसीयत
माँग कर इज़्ज़त कभी पलती नहीं है
सामना कर मुश्किलों का तू ख़ुशी से
यूँ मुसीबत भाग कर टलती नहीं है
छोड़ना बस तू नहीं मैदान अपना
हार के बिन जीत भी फलती नहीं है
— Vinod Ganeshpure















