jab bhi deewaana koi raah bhatk jaata hai | जब भी दीवाना कोई राह भटक जाता है

  - Vikram Gaur Vairagi

जब भी दीवाना कोई राह भटक जाता है
सब से पहले तो मेरा आप पे शक जाता है

शर्त पूरी हो यही जीत नहीं कहलाती
शिव धनुष राम के हाथों में चटक जाता है

पहले कह देता है ग़ुस्से में कोई बात बुरी
और फिर अपने ही ग़ुस्से पे भड़क जाता है

वो बताते हैं मुझे पीने पिलाने का शऊर
जिनसे नश्शे में अभी जाम छलक जाता है

आप के शहर के आशिक़ भी हमें सुनते हैं
उस तरफ़ भी इसी दरिया का नमक जाता है

  - Vikram Gaur Vairagi

Motivational Shayari in Hindi

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