उस की गली जितना सुनसान नहीं होता है
वीराना इतना वीरान नहीं होता है
इश्क़ में कोई भी एहसान नहीं होता है
तू नइँ मानता है मत मान नहीं होता है
वो उस बात पे मुझ से झगड़ा कर लेते हैं
जिस का मुझ को बिल्कुल ध्यान नहीं होता है
कुछ रिश्तों में दिल को आज़ादी नइँ रहती
कुछ कमरों में रौशनदान नहीं होता है
दोस्त भिखारी भी आते हैं दरवाज़े पर
हर आने वाला मेहमान नहीं होता है
— Vikram Gaur Vairagi















