ज़रा से ग़म को ये लोग इतना बढ़ा चढ़ा कर दिखा रहे हैं
ये आजकल के यहाँ के लौंडे हमें मोहब्बत सिखा रहे हैं
तेरे दिए वो बदन के छाले मेरे बदन पर पड़े हुए हैं
नहीं भरेंगे इसे कभी हम यही मोहब्बत निभा रहे हैं
करो मोहब्बत ये शान से तुम ख़ुदा कहो इश्क़ में उसे तुम
कि जान धड़कन गुलाब हमदम ये तो सभी ही बुला रहे हैं
किसे पड़ी है तिरे यहाँ पर ये दर्द अपने छुपा के रख तू
पता नहीं ये चले किसी को कि किस लिए मुस्कुरा रहे हैं
मुझे तिरे हुस्न की ये बदबू यहाँ परेशान कर रही है
नहीं थे इतने वो ख़ूब-सूरत कि लोग जितने बता रहे हैं
वो ख़ुश बहुत हैं मेरे बिना भी ये देख अच्छा लगा हमें पर
तेरे बिना जी नहीं रहे हम किसी तरह बस बिता रहे हैं















