तेरे बालों की ख़ुश्बू कहती है
    तू किसी तीसरे से मिल रहा है

    Adarsh Anand Amola
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    जानता हूँ तुझे साहिल मे हवा छेड़ेगी
    बाल मत खोलना सैल-ए-बला ला सकती हो

    Adarsh Anand Amola
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    इतना प्यारा है तू दिलरुबा बाँटे सब में ख़ुशी ही ख़ुशी
    फूल खिलने लगे उस जगह तू जिधर मुस्कुराने लगा

    Adarsh Anand Amola
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    रंज को था कुछ डुबाना शायरी करने लगे
    हाल अपना था सुनाना शायरी करने लगे

    Adarsh Anand Amola
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    प्यार का जाम तुझे ऐसा पिलाना है मुझे
    माज़ी के मर्ज़ की यादों को भुलाना है मुझे

    Adarsh Anand Amola
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    यूँ ही अब वक़्त ऐसे ढल रहा है
    जब से तू यार तन्हा चल रहा है

    कल तुझे चूमा था ज़रा मैंने
    कल से मेरा ये दिल उछल रहा है

    उसकी आहट दिनों से आई नहीं
    मेरा दिल अब बहुत मचल रहा है

    तेरे जाने के बाद ये मन अब
    तेरी तस्वीर से बहल रहा है

    Adarsh Anand Amola
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    दूर तुझ से अगर गए होते
    रात अपने शहर गए होते

    चलते तेरी तरफ़ रहे हर पल
    डरते तो बस ठहर गए होते

    Adarsh Anand Amola
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    मोहब्बत की तरफ क्यूँ जा रहे हैं
    ये उससे पूछ कर हम आ रहे हैं

    शुरू की शायरी तेरी वजह से
    तुझे अब शायरी में पा रहे हैं

    Adarsh Anand Amola
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    हिज्र की रात ऐसी खाने लगी
    मेरी आँखें तुझे ही गाने लगी

    Adarsh Anand Amola
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    अपने जीवन का हम-सफ़र देखें
    बैठे जंगल मे हम शजर देखें

    Adarsh Anand Amola
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