यूँँ ही अब वक़्त ऐसे ढल रहा है
जब से तू यार तन्हा चल रहा है
कल तुझे चूमा था ज़रा मैं ने
कल से मेरा ये दिल उछल रहा है
उस की आहट दिनों से आई नहीं
मेरा दिल अब बहुत मचल रहा है
तेरे जाने के बा'द ये मन अब
तेरी तस्वीर से बहल रहा है
— Adarsh Anand Amola
जब से तू यार तन्हा चल रहा है
कल तुझे चूमा था ज़रा मैं ने
कल से मेरा ये दिल उछल रहा है
उस की आहट दिनों से आई नहीं
मेरा दिल अब बहुत मचल रहा है
तेरे जाने के बा'द ये मन अब
तेरी तस्वीर से बहल रहा है
Other ghazal from the same pen
Shers of aahat.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling