रंज को था कुछ डुबाना शा'इरी करने लगे
हाल अपना था सुनाना शा'इरी करने लगे
यूँ भी कोई शख़्स खो सकता है पूरा प्यार में
था मुझे सब को बताना शा'इरी करने लगे
छोटी सी बातों पे ग़ुस्सा आता उस को 'आदतन
कुछ तो कर के था मनाना शा'इरी करने लगे
— Adarsh Anand Amola















