Talha Lakhnavi

Top 10 of Talha Lakhnavi

    यादों से अपनी मेरे जज़बात-ए-दिल जगा के
    सोए हैं चैन से वो नींदें मिरी उड़ा के

    महफ़िल में मेरा आना हो जाएगा सुआरत
    इक बार देख लें वो नज़रें अगर उठा के

    लब खोलने की मुझ को मिल जाए गर इजाज़त
    अपना बनाऊँ तुम को अपनी ग़ज़ल सुना के

    दो फूल ज़ौ-फ़िशाँ हैं जो गेसुओं में उन के
    मुझ को बुला रहे हैं ख़ुशबू लुटा लुटा के

    वैसे तो तुम को तन्हा सब छोड़ कर गए हैं
    इक बार देख लेना हम को भी आज़मा के

    मैं सोचता हूँ उन की ता'रीफ़ में लिखूँ क्या
    अंदाज़ हैं ग़ज़ब के तेवर भी हैं बला के

    तलहा ये रंग यूँ ही आए नहीं ग़ज़ल में
    हम साथ चल रहे हैं बहती हुई हवा के
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    Talha Lakhnavi
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    सीने में मेरे दिल ये धड़कता है के तुम हो
    साँसों पे किसी और का कब्ज़ा है के तुम हो

    तन्हा मैं चला जाता हूँ हर राह पे फिर भी
    हर मोड़ पे एहसास ये होता है के तुम हो

    अंदाज़ ए सुख़न देख के कहते हैं ये अहबाब
    शे'रों में मेरे मीर का लहजा है के तुम हो

    ग़म इस का नहीं छोड़ दे तन्हा ये ज़माना
    अब मुझ को फ़क़त तुम पे भरोसा है के तुम हो

    जो आता है साए की तरह ख़्वाब में अक्सर
    वो मेरा कोई चाहने वाला है के तुम हो

    तलहा वो तुम्हें सामने लाएँ भी तो कैसे
    सब से तो इसी बात का झगड़ा है के तुम हो
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    तेरी ता'रीफ़ बताने को ग़ज़ल कहते हैं
    हम कहाँ नाम कमाने को ग़ज़ल कहते हैं

    जब तेरी आँखों से पी लेते हैं इक जाम कभी
    ख़ुद को फिर होश में लाने को ग़ज़ल कहते हैं

    जब कभी हम से ख़फ़ा होती है वो जाने ग़ज़ल
    रात फिर उस को मनाने को ग़ज़ल कहते हैं

    दूसरों के लिए हम राह-ए-अदब पर चल कर
    नक़्श-ए-पा अपना बनाने को ग़ज़ल कहते हैं

    हम से जो दूर रहा करते हैं उन को अक्सर
    दिल की आवाज़ सुनाने को ग़ज़ल कहते हैं

    ज़िंदगी फ़िल्म की मानिंद हुई है जबसे
    अपना किरदार निभाने को ग़ज़ल कहते हैं

    एक हम ही नहीं जितने भी हैं शाइ'र तलहा
    अपनी पहचान बनाने को ग़ज़ल कहते हैं
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    जो अपने लफ़्ज़ों से हिज्र तोड़े मोहब्बतों में
    दिलाए फिर दो दिलों को राहत वो शा'इरी है
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    तुम से बिछड़े तो हम शे'र कहने लगे
    सह के दुनिया के ग़म शे'र कहने लगे

    बे-वफ़ाई तेरी हौसला दे गई
    इतने टूटे सितम शे'र कहने लगे

    तेरे जाने से ये फ़ाइदा तो हुआ
    आज हम कम से कम शे'र कहने लगे

    गर भरोसा न हो आके ख़ुद देख लो
    हम तुम्हारी क़सम शे'र कहने लगे

    ज़िंदगी में कई बार ऐसा हुआ
    जब भी रूठा सनम शे'र कहने लगे

    जब अचानक कभी याद तुम आ गए
    हो गई आँख नम शे'र कहने लगे

    तेरे आने की जिस दम ख़बर मिल गई
    आ गया दम में दम शे'र कहने लगे

    इक तअ़ल्लुक़ वफ़ाओं का रक्खा मगर
    जब भी टूटा भरम शे'र कहने लगे

    नींद 'तलहा' न जब रात को आई तो
    ले के काग़ज़ क़लम शे'र कहने लगे
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    तेरी जब से इनायत हो गई है
    मेरी दुनिया ही जन्नत हो गई है

    मैं अब उस की ज़रूरत हो गया हूँ
    वो अब मेरी ज़रूरत हो गई है

    हसीं इतनी मेरी क़िस्मत कहाँ थी
    मगर तेरी बदौलत हो गई है

    सनम जब से मिला है साथ तेरा
    मुझे जीने की आदत हो गई है

    मोहब्बत में कहाँ पाकीज़गी अब
    बराए वस्ल चाहत हो गई है

    सँभलती ही नहीं है अब सँभाले
    जवानी इक मुसीबत हो गई है

    बढ़ी है आज कल ता'लीम 'तलहा'
    मगर तहज़ीब रुख़सत हो गई है
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    Talha Lakhnavi
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    इस एक फ़िक्र ने हैरान कर दिया है मुझे
    फ़लक पे चाँद तो आया है तुम नहीं आए
    Talha Lakhnavi
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    जब भी तेरी जुदाई में जलना पड़ा मुझे
    हर लम्हा मोम बन के पिघलना पड़ा मुझे

    जब भी तेरा मिज़ाज बदलने की चाह की
    अपना मिज़ाज ख़ुद ही बदलना पड़ा मुझे

    रहता था उस के दिल में जो छोड़ा उसे तो आज
    आँखों से अश्क बनके निकलना पड़ा मुझे

    वादे पे अपने वो नहीं आई जो डेट पर
    अरमान अपने दिल का कुचलना पड़ा मुझे

    मेरा नसीब बनके रहा मेरा हम सफ़र
    हर गाम उस के साथ ही चलना पड़ा मुझे

    पैग़ाम देने आया था "तलहा" मैं अम्न का
    लेकिन सितम की गोद में पलना पड़ा मुझे
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    दूर जाने की बात मत करना
    दिल दुखाने की बात मत करना

    तुम हमारे हो हम तुम्हारे हैं
    अब ज़माने की बात मत करना

    एक दूजे के दिल में रहना है
    आशियाने की बात मत करना

    हम तुम्हें याद कर के जीते हैं
    भूल जाने की बात मत करना

    आज मुद्दत के बा'द आए हो
    जल्दी जाने की बात मत करना

    तुम जहाँ छोड़ कर गए थे हमें
    उस ठिकाने की बात मत करना

    अब न रूठेंगे हम कभी 'तलहा'
    तुम सताने की बात मत करना
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    Talha Lakhnavi
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