तुम सेे बिछड़े तो हम शे'र कहने लगे

सह के दुनिया के ग़म शे'र कहने लगे

बे-वफ़ाई तेरी हौसला दे गई
इतने टूटे सितम शे'र कहने लगे

तेरे जाने से ये फ़ाइदा तो हुआ
आज हम कम से कम शे'र कहने लगे

गर भरोसा न हो आके ख़ुद देख लो
हम तुम्हारी क़सम शे'र कहने लगे

ज़िंदगी में कई बार ऐसा हुआ
जब भी रूठा सनम शे'र कहने लगे

जब अचानक कभी याद तुम आ गए
हो गई आँख नम शे'र कहने लगे

तेरे आने की जिस दम ख़बर मिल गई
आ गया दम में दम शे'र कहने लगे

इक तअ़ल्लुक़ वफ़ाओं का रक्खा मगर
जब भी टूटा भरम शे'र कहने लगे

नींद 'तलहा' न जब रात को आई तो
ले के काग़ज़ क़लम शे'र कहने लगे

— Talha Lakhnavi

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