दिल है क्यूँ बे-क़रार समझा कर

बात इतनी तो यार समझा कर

बैठ जा आ के मेरे पहलू में
मेरे दिल की पुकार समझा कर

प्यार तो ख़ुद-ब-ख़ुद ही होता है
कौन करता है प्यार समझा कर

दूसरा दूर तक नहीं कोई
मैं हूँ तुझ पर निसार समझा कर

तू समझ ले मैं बोलता कम हूँ
एक बोलूँ हज़ार समझा कर

अब मेरे दिल की धड़कनों पे फ़क़त
है तेरा इख़्तियार समझा कर

फूल उस को समझ तू ऐ 'तलहा'
और दुनिया को ख़ार समझा कर

— Talha Lakhnavi

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