तेरी जब से इनायत हो गई है
मेरी दुनिया ही जन्नत हो गई है
मैं अब उस की ज़रूरत हो गया हूँ
वो अब मेरी ज़रूरत हो गई है
हसीं इतनी मेरी क़िस्मत कहाँ थी
मगर तेरी बदौलत हो गई है
सनम जब से मिला है साथ तेरा
मुझे जीने की आदत हो गई है
मोहब्बत में कहाँ पाकीज़गी अब
बराए वस्ल चाहत हो गई है
सँभलती ही नहीं है अब सँभाले
जवानी इक मुसीबत हो गई है
— Talha Lakhnavi















