थोड़ा मेरा, थोड़ा उसका, बाकी सबका आधा चाँद
देख रहा है ख़ुद को सब में, बँटते आधा आधा चाँद
पिछली कितनी रातों से हम मावस के ही मारे थे
आज फ़लक में उम्मीदों के जैसा निकला आधा चाँद
शाम सुनहरी है लेकिन गर कुछ पल तुम जो ठहरो तो
सात समंदर लाँघ के झट से आ जाएगा आधा चाँद
तुमने जाने कितने घण्टो इतराते श्रृंगार किया
पहले से ही प्यार में तेरे पागल निकला आधा चाँद
तेरा मुझ से मिलना बिल्कुल ईदी मिलने जैसा है
सदियों तेरी राह निहारी, बतलाएगा आधा चाँद
चाँद सभी को अपने प्रेमी जितना सुन्दर लगता है
एक तुम्हारे आगे लगता कितना सादा आधा चाँद
दूर चला जाऊँगा जब मैं ख़ुद से, तुमसे और सबसे
तब तुम बाहों में भर लेना प्यार जताता आधा चाँद
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