Mamta 'Anchahi'

Mamta 'Anchahi'

@anchahi.anchahi

Mamta 'Anchahi' shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Mamta 'Anchahi''s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

बस अगर आदमी का चल जाता तो दिवारों के कान होते नईं — Mamta 'Anchahi'
बस ग़रीबों को नहीं थी शहर भर में छत कोई शुक्र है भारत में कोई तो मसीहा हो गया — Mamta 'Anchahi'
ये नागिन सी तेरी ज़ुल्फ़ें घटा बनकर जो छाएंगी तड़प कर मर भी जाऊँ तो नहीं इल्ज़ाम लिक्खूँगा — Mamta 'Anchahi'
हम उन से मिल के जब भी अपने घर को लौट आते हैं ये मानो ख़ुद की मय्यत ख़ुद हमीं ज़िंदा उठाते हैं — Mamta 'Anchahi'

Ghazal

जो मेरा था आज देखो वो पराया हो गया उस के भी ईमान का यारों है सौदा हो गया मो'जिज़ा ही लगता है उस का बिछड़ जाना मुझे दुख तो है, क्यूँँ शहर में है ज़िक्र इस का हो गया उन से ताबे'दारी होती ये कहाँ मुमकिन था जान इक दफ़ा छूने से है दुश्मन चहीता हो गया मामला संगीन था कुछ भी समझ पाई नहीं वो फ़रेबी निकला तब माना के अच्छा हो गया वो फ़रेबी था ये सच कब तक छुपा रहता कहो है मगर अफ़सोस मेरा वक़्त ज़ाया' हो गया टूट कर हाथों से उस के ग़म नहीं होता मुझे ये तो होना ही था इक दिन, फिर भी हव्वा हो गया उस का जब भी नाम लिक्खा और मिटाया है कभी देख के तहरीर, आँखों में है छाला हो गया — Mamta 'Anchahi'
तुझे अब शहर में क्यूँ रो रो अपने याद आते हैं वो तेरे दोस्त और तेरे वो अपने याद आते हैं इमारत हैं यहाँ ऊंची मगर दिल हैं बड़े छोटे बड़ा दिल चाहिए तो तुम को अपने याद आते हैं वो मिट्टी के घड़े की सौंधी ख़ुशबू अब नहीं आती नयन से नीर रिसता है जो अपने याद आते हैं जिन्हें छोड़ा था दौलत की तलब में एक दिन तुम ने तलब अब तक अधूरी है तो अपने याद आते हैं यहाँ अपना नहीं कोई सभी मतलब के हैं साथी जो बिन मतलब भी थे अपने वो अपने याद आते हैं वही बस ख़ास होता है ज़रूरत होती है जिस की समय का फेर है भैया सो अपने याद आते हैं हज़ारों सैकड़ों बारी लिखे थे माँ ने ख़त तुम को जवाब-ए-ख़त लिखो तुम कह दो अपने याद आते हैं — Mamta 'Anchahi'