एक लड़की ख़ुश थी लेकिन मर गई
तुझ से मिलना था वो तुझ बिन मर गई
छीन लेता था ज़माना ख़्वाब तक
ख़्वाब बुनते बुनते इक दिन मर गई
सर पे ज़िम्मेदारियाँ थी इतनी फिर
वो कुँवारी और कमसिन मर गई
इक तमन्ना थी के दुल्हन वो बने
इस तमन्ना में अभागिन मर गई
आख़िरी बारी जब आया देखने
उस ने पाया दिन वो गिन गिन मर गई
— Mamta 'Anchahi'















