समर में हो शिकेबा जाते हैं क्या?
हटा दुश्मन मुखौटा जाते हैं क्या?
नहीं होते हैं जिन के काम पूरे
घरों से खा मुनक़्क़ा जाते हैं क्या?
जो रहते हैं सदा वीराने में वो
मुहब्बत से भी उकता जाते हैं क्या ?
बँटें हैं अलहदा जो सोच ले कर
कहीं रिश्तों को दफ़ना जाते हैं क्या?
हर इक माँ डाँट कर देती दुआ है
शजर ख़ुद अपने फल खा जाते हैं क्या?
समुंदर पार करने को परिंदे
उतर के अब्र से आ जाते हैं क्या?
वसीला अपनों को समझा जिन्होंने
मक़ाम-ए-शख़्सियत पा जाते हैं क्या?
— Mamta 'Anchahi'















