दाव पर जब दाव हो परवान चढ़ता खेल है

खेल में हर दाव पर बाज़ी पलटना खेल है

दुश्मनी हो या मुहब्बत जो भी हो खुल कर करो
एक-तरफ़ा जो अगर है तो अधूरा खेल है

तुम को तो आया नहीं रिश्ता निभाना आज तक
मौत तक रिश्ता निभाना ज़िंदगी का खेल है

हीरे-सा किरदार मिलना अब तो नामुमकिन हुआ
कोयले की खान में हीरे का मिलना खेल है

मुश्त-ए-ग़म औक़ात में रखता है बंदे को सदा
जो ये कहता है कि अंगारों पे चलना खेल है

— Mamta 'Anchahi'

More by Mamta 'Anchahi'

Other ghazal from the same pen

See all from Mamta 'Anchahi' →

Zindagi Shayari Collection

Shers of zindagi shayari collection.

All Zindagi Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling