boxes-v1
logo
coin0
  • Search
  • Shayari
  • Writers
  • Events
  • Blog
  • Store
  • Help
  • Login
  • home-v1
  • swipe
  • feather-v4
  • shopping-bag-v1
  • user-v1
cross
preview

By:

00:00/00:00

playButtonWhite
backBanne Miyan Jauhar

Top 10 of Banne Miyan Jauhar

Banne Miyan Jauhar

Top 10 of Banne Miyan Jauhar

    शक्ल है मेरी जैसे कटोरा
    या कोई चाँदी का गोला
    रंग है मेरा गोरा गोरा
    अँधेरी शब का मैं हूँ उजाला
    मेरा उजाला हर जा फैला
    बाग़ हो बस्ती या हो सहरा
    चाहती है मुझ को सब दुनिया
    घर घर है मेरा ही चर्चा
    मुझ से बहलता है जी सब का
    छोटा बच्चा हो या बूढ़ा
    हैं आकाश पे जितने तारे
    हैं ये सब मेरे ही प्यारे
    मेरी चमक के आगे देखी
    रौशनी है इन सब की फीकी
    हक़ ने इतना रुत्बा बढ़ाया
    मैं ने ऊँचा दर्जा पाया
    तुम ऐ भोले भाले लड़को
    देखो मुझ को और सबक़ लो
    फ़ाएदा तुम भी कुछ पहुँचाओ
    जियो तो काम सभों के आओ
    गीत तुम्हारे गाएगी दुनिया
    होगा तुम्हारा हर-जा चर्चा
    हक़ है 'जौहर' का ये कहना
    काम आना जब तक भी रहना
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    10
    0 Likes
    ऐ मिरी प्यारी अम्माँ आना
    निन्दिया आई मुझ को सुलाना
    सुस्त हैं आ'ज़ा मेरे सारे
    आँखें बंद हैं नींद के मारे
    खाना पीना बातें करना
    कुछ भी मुझ को अब नहीं भाता
    अम्माँ मेरा बिस्तर लाना
    नींद आई है मुझ को सुलाना
    जल्दी फिर उठना है मुझ को
    देर न मकतब जाने में हो
    सुब्ह को जिस दम सो के उठूँगा
    अपने खिलौने तुम से लूँगा
    भाई जान अब तुम भी आओ
    अपने बिस्तर पर सो जाओ
    रात है सोने ही को बनाई
    सो रहो तुम भी 'जौहर' भाई
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    9
    0 Likes
    मैं हूँ चहकने वाली बुलबुल
    मेरे लिए ही खिलते हैं गुल
    गीत सुनाती हूँ फूलों को
    गले लगाती हूँ फूलों को
    आवाज़ ऐसी सुरीली पाई
    मेरी बोली सब को भाई
    दम फूलों का भरती हूँ मैं
    फूलों पर ही मरती हूँ मैं
    मेरे लय हर इक को भाई
    ख़ुश है मुझ से सारी ख़ुदाई
    शाइ'र हैं मशरिक़ में जितने
    गुन गाते हैं सब ही मेरे
    ज़ाहिर में हूँ छोटी लेकिन
    सारा चमन सूना है मुझ बिन
    लड़को तुम तो ख़ुद हो दाना
    भेद ये क्या अब तुम को बताना
    मेरी सदा दिलकश है जो इतनी
    बात बड़ी इस में नहीं कोई
    दी है ये ने'मत मुझ को ख़ुदा ने
    मोह लिए दिल मेरी सदा ने
    कौन ख़ुदा वो सब का मौला
    जिस ने इस दुनिया को बनाया
    मेंह बरसाया पौदे उगाए
    रंग-बिरंगे फूल खिलाए
    जिन की भीनी भीनी बू से
    जंगल महके गुलशन महके
    है वो दो-आलम का रखवाला
    कहते हैं जिस को बारी-तआ'ला
    हम सब का मालिक वो ख़ुदा है
    माँ बाप और भाई से सिवा है
    गाती हूँ गीत उस के हर दम
    जिस ने बनाया है ये आलम
    गीत उसी के तुम भी गाओ
    अपने रब को भूल न जाओ
    'जौहर' फिर दुनिया है तुम्हारी
    सुनता है सब कुछ वो हमारी
    फ़ज़्ल ख़ुदा का जब हो जाए
    जो माँगे इंसान वो पाए
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    8
    0 Likes
    बच्चो निज़ाम-उल-मुल्क वज़ीर
    दानाई की था तस्वीर
    उस से मिलने को सदहा
    आते थे अदना आ'ला
    अच्छी जगह पर बिठलाता
    और मोहब्बत फ़रमाता
    इक बूढ़ा आता हर दिन
    हद से ज़ियादा जिस का सिन
    लोगों ने उस से पूछा
    आता क्यूँ है ये बुढ्ढा
    करते हो क्यूँ उस की इज़्ज़त
    इस बुड्ढे की ये अज़्मत
    बोला उन सब से ये वज़ीर
    है अच्छा तुम से ये फ़क़ीर
    तुम तो ख़ुशामद करते हो
    मेरी ख़ुशी पर मरते हो
    लेकिन ये बुढ्ढा दाना
    मेरे ऐब है बतलाता
    दोस्त ये है मेरा असली
    माना हूँ हर बात इस की
    इस को न दुश्मन जानो तुम
    मेरा कहना मानो तो तुम
    दोस्त वही है ऐ 'जौहर'
    बात कहे सच्ची मुँह पर
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    7
    0 Likes
    है ज़बाँ पर सब की मिदहत इल्म की
    क्यूँ न हो दिल में मोहब्बत इल्म की
    क्यूँ न हो हर इक को चाहत इल्म की
    हर किसी को है ज़रूरत इल्म की
    इल्म के रुत्बे से वाक़िफ़ है जहाँ
    गोशे गोशे में है शोहरत इल्म की
    जिस को चसका लग गया है इल्म का
    पूछिए उस से हक़ीक़त इल्म की
    बस उसी ने पाई इज़्ज़त मुल्क में
    दिल से की है जिस ने ख़िदमत इल्म की
    सारे दुनिया का चहीता है ये इल्म
    रहती है हर दिल में उल्फ़त इल्म की
    वो ज़लील-ओ-ख़्वार दुनिया में हुआ
    जिस किसी ने की न इज़्ज़त इल्म की
    दो जहाँ की उस को ने'मत मिल गई
    हो गई जिस पर इनायत इल्म की
    सुर्ख़-रू होता है वो इक दिन ज़रूर
    रहती है जिस दिल को चाहत इल्म की
    तख्त-ए-शाही क्या है मिलता है ख़ुदा
    इस से बढ़ कर क्या हो बरकत इल्म की
    क्यूँ किसी के आगे वो फैलाए हाथ
    हाथ आई जिस के दौलत इल्म की
    है ये कुंजी ऐश और आराम की
    क्या बताऊँ क़द्र-ओ-क़ीमत इल्म की
    सारी दुनिया पा रही है जिस से फ़ैज़
    है हक़ीक़त में वो दौलत इल्म की
    जान से इस को समझते हैं अज़ीज़
    जिन पे रौशन है हक़ीक़त इल्म की
    हो वो बच्चा या हो बूढ़ा या जवान
    हर किसी को है ज़रूरत इल्म की
    जाओ 'जौहर' हर कहीं बे-ख़ौफ़ तुम
    कोई लूटेगा न दौलत इल्म की
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    6
    0 Likes
    तुम ने देखा होगा घोड़ा
    क्या सीना उस का है चौड़ा
    शक्ल है प्यारी वो है बाँका
    काठी अच्छी रंग भी अच्छा
    बाल उस की दम और गर्दन के
    क्या हैं मुलाएम और चमकीले
    गोल क़दम हैं टाँगें पतली
    रानें ताक़त-वर और चिपटी
    ना'ल अगर हों सुम नहीं घिसते
    दौड़ते हैं आराम से घोड़े
    सुम हैं सख़्त कुछ ऐसे बच्चो
    काटें तो ईज़ा न हो उस को
    कान हैं छोटे खड़े नुकीले
    दाँत हैं मुँह में आगे पीछे
    घास चना बस इस की ग़िज़ा है
    चबा चबा कर ये खाता है
    तेज़ है इतना दौड़ने वाला
    दम कई मीलों में है लेता
    अक़्ल समझ अच्छी है इस की
    और वफ़ा भी इस में पाई
    रखता है ये याद वो रस्ता
    इस ने जो इक बार भी देखा
    ताबे' अपने मालिक का है
    उस के इशारे पर चलता है
    रंज में आक़ा को जो है पाता
    अपनी जान को भी है खपाता
    तुम भी सबक़ लो इस से बच्चो
    अपने बड़ों को राज़ी रक्खो
    जो कहता है 'जौहर' मानो
    इस की बात को झूट न मानो
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    5
    0 Likes
    बच्चो इक दिन नबी हमारे
    मए सहाबा सफ़र को निकले
    वक़्त पकाने का जब आया
    सभों ने अपना हाथ बढ़ाया
    ज़ब्ह किसी ने कर ली बकरी
    किसी ने फ़ौरन खाल निकाली
    इक इक काम किया हर इक ने
    काम हुए यूँँ पूरे सारे
    मगर रहा लकड़ी का लाना
    आप ने चाहा जंगल जाना
    आप को हर साथी ने रोका
    किसी का लेकिन कहा न माना
    और जंगल को आप सिधारे
    लाए उठा कर नबी हमारे
    देख के अख़्लाक़ उन के प्यारे
    ख़ुश हुए साथी आप के सारे
    'जौहर' तुम भी याद ये रखो
    यकसाँ समझो हर इंसाँ को
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    4
    0 Likes
    तुम ने क्या देखा है तोता
    रंग हरा है प्यारा प्यारा
    मुड़ी हुई है चोंच सिरे पर
    रंगत उस की लाल है ख़ुश-तर
    दुम लंबी और हरे हरे पर
    जाता है हर जा ये उड़ कर
    पतली सी टहनी के ऊपर
    बैठता है ये तोता चढ़ कर
    जहाँ भी है ये आता जाता
    उम्दा उम्दा मेवे खाता
    इस में हैं गुन प्यारे सारे
    सब हैं इस के चाहने वाले
    प्यारी बातें हैं ये सुनाता
    दिल का सब दुख है ये मिटाता
    तुम भी समझ लो ये ऐ लड़को
    जो उस्ताद बताए सीखो
    काम करो तुम ऐसे प्यारे
    घर भर के हो जाओ दुलारे
    सारी दुनिया तुम को चाहे
    गीत तुम्हारे घर घर गाय
    वर्ना तुम्हारी दुर्गत होगी
    सब को तुम से नफ़रत होगी
    'जौहर' की इस बात को मानो
    दोस्त उसे तुम अपना जानो
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    3
    0 Likes
    खेत में चंद मुर्ग़ियाँ हम-सिन
    चुग रही थीं ख़ुशी ख़ुशी इक दिन
    और दो मुर्ग़े ऐसे नज़र आए
    लड़ रहे थे जो एक भुट्टे पर
    इतने में इक तीसरा मुर्ग़ा
    आ के चुपके से भुट्टा ले भागा
    रह गए दोनों हो के वो ख़ामोश
    और दोनों को आया अब ये होश
    हम न लड़ते तो करते क्यूँँ नुक़सान
    सच तो ये है कि हैं बड़े नादान
    अब जो पछताए फ़ाएदा क्या है
    फूट का बस यही नतीजा है
    इस से मा'लूम हो गया लड़को
    दो लड़ें तीसरे का अच्छा हो
    मिल के रहने से काम होता है
    यही दस्तूर कुल जहाँ का है
    और लड़ते रहे अगर बाहम
    पा नहीं सकते फ़ाएदा कुछ हम
    याद रक्खो ये बात 'जौहर' की
    ये उड़ाता नहीं है बे-पर की
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    2
    0 Likes
    शाम हुई है सूरज डूबा
    रंग ज़माने का है बदला
    शाम सुहानी देखो आई
    कैसा सुहाना वक़्त है लाई
    दिल को लुभा लेता है कैसा
    चैन हमें देता है कैसा
    शाम का अच्छा अच्छा मंज़र
    दिल को लुभाने वाला मंज़र
    घर को चला है खेती वाला
    मेहनत से सब तन है काला
    बैल भी छोड़ा हल भी छोड़ा
    घर की जानिब मुँह को मोड़ा
    हाँका वो बैलों को अपने
    चला वो घर को धी
    में धी
    में
    खेत से अपने घर को सिधारा
    लेगा अब आराम बेचारा
    बैलों को खूँटों से बाँधा
    सामने उन के भूसा डाला
    बैठा ख़ुद बच्चों में जा कर
    कैसा ख़ुश है उस का घर भर
    इधर उधर से चिड़ियाँ उड़ कर
    आ बैठीं शाख़ों के ऊपर
    अब ये शब भर लेंगी बसेरा
    सुब्ह को फिर खेतों का फेरा
    झील किनारे आ कर बैठी
    दम लेने को हर मुर्ग़ाबी
    तुम भी बच्चो खेलना छोड़ो
    अपने अपने घर को चल दो
    सारा दिन राहत से गुज़रा
    'जौहर' शुक्र करो ख़ालिक़ का
    Read Full
    Banne Miyan Jauhar
    Share
    1
    0 Likes
whatsapp Get Shayari on your Whatsapp
Zubair Ali TabishZubair Ali TabishAkbar AllahabadiAkbar AllahabadiVashu PandeyVashu PandeyAli Sardar JafriAli Sardar JafriWaseem BarelviWaseem BarelviZia MazkoorZia MazkoorFiraq GorakhpuriFiraq GorakhpuriMirza GhalibMirza GhalibJaved NadeemJaved NadeemSiraj Faisal KhanSiraj Faisal Khan