बच्चो निज़ाम-उल-मुल्क वज़ीर
दानाई की था तस्वीर
उस से मिलने को सदहा
आते थे अदना आ'ला
अच्छी जगह पर बिठलाता
और मोहब्बत फ़रमाता
इक बूढ़ा आता हर दिन
हद से ज़ियादा जिस का सिन
लोगों ने उस से पूछा
आता क्यूँ है ये बुढ्ढा
करते हो क्यूँ उस की इज़्ज़त
इस बुड्ढे की ये अज़्मत
बोला उन सब से ये वज़ीर
है अच्छा तुम से ये फ़क़ीर
तुम तो ख़ुशामद करते हो
मेरी ख़ुशी पर मरते हो
लेकिन ये बुढ्ढा दाना
मेरे ऐब है बतलाता
दोस्त ये है मेरा असली
माना हूँ हर बात इस की
इस को न दुश्मन जानो तुम
मेरा कहना मानो तो तुम
दोस्त वही है ऐ 'जौहर'
बात कहे सच्ची मुँह पर
— Banne Miyan Jauhar















