Javed Nadeem

Top 10 of Javed Nadeem

    दरख़्त अपने फल से पहचाना जाता है
    और फल अपने दरख़्त से
    नेकी बदी एक मेआ'र हैं तुम्हारी शनाख़्त का
    कि वो तुम से हैं
    और तुम उन से
    आईना तो वो ही दिखाएगा
    जो उस के मुक़ाबिल होगा
    Read Full
    Javed Nadeem
    10
    0 Likes
    "रिश्ते"
    रिश्ते
    आदमी की कमज़ोरी हैं
    या
    कमज़ोरी के एहसास का नतीजा
    ये नाग-फनी की वो बाढ़ हैं
    जिसे फ़स्ल की हिफ़ाज़त के लिए
    खेत की मुंडेरों पर लगा दिया जाता है
    और
    नाग-फनी का क़ुर्ब
    ज़रर से ख़ाली नहीं है
    Read Full
    Javed Nadeem
    9
    0 Likes
    सफ़र पर निकला मुसाफ़िर पलट कर अपने घर को आ जाता है
    ज़मीन दाएरे में घूम कर फिर उसी मक़ाम से अपने सफ़र की इब्तिदा करती है
    वक़्त एक तेज़ रफ़्तार घोड़ा है
    जो हाल को माज़ी में तब्दील करता मुस्तक़बिल की तरफ़ दौड़ा चला जा रहा है
    कुम्हार का चाक घूम रहा है
    और
    कुम्हार के मश्शाक़ हाथ मिट्टी से मुख़्तलिफ़ पैकर तराश रहे हैं
    तहज़ीब-ओ-तमद्दुन इंतिहा को पहुँच कर फिर अपनी इब्तिदा को पलटते हैं
    तुम्हारी पसंद ना-पसंद पर तुम्हारे अस्लाफ़ असर-अंदाज़ हैं
    आदमी अपने संस्कारों से बँधा है
    ये काल-चक्र
    कुम्हार का घूमता हुआ पहिया
    तुम्हारी तहक़ीक़-ए-तज्दीद है तुम्हारे पहलों की
    हर मुकम्मल ना-मुकम्मल है
    हर तख़्लीक़
    एक तजस्सुस ना-मुकम्मल से मुकम्मल की तरफ़
    ज़िंदगी
    इकाई में इकाई के जम्अ' का अमल
    ला-महदूद तक
    Read Full
    Javed Nadeem
    8
    0 Likes
    कुल्हाड़ी ने दरख़्त से दस्ता हासिल किया
    और क़ुव्वत पा ली
    और फिर
    उसी दस्ते की मदद से दरख़्त पर हमला कर दिया

    दरख़्त ने अमरबेल को ज़िंदगी दी
    नुमू बख़्शी
    और अमर बैल ने
    दरख़्त को क्या दिया
    इस्तेहसाल

    सिगरेट अपने वजूद को धुएँ में तब्दील कर रहा है
    और मैं रिश्तों के तअल्लुक़ से सोच रहा हूँ
    Read Full
    Javed Nadeem
    7
    0 Likes
    कल जो गुज़र गया
    एक ख़्वाब था ख़्वाब जो टूट गया
    आईने की तरह
    और टूटे आईने की किर्चियाँ समेटना हाथों को लहू-लुहान कर देगा

    कल आने वाला
    अब्र का एक पारा है
    जो तुम्हारी ज़मीनों पर बरसे बग़ैर भी गुज़र सकता है
    वो तुम्हारी मौहूम उम्मीदों का साया है
    और साया कब किस का हो पाया है
    तुम साए को पकड़ने की कोशिश मत करो
    कि मुबहम उम्मीदों की ना-पुख़्ता शाख़ें
    ख़ुशी से फूल नहीं खिला सकतीं
    आज
    आज तुम्हारा अपना है
    तुम्हारी मुट्ठी के सिक्के की तरह
    आज के पौदों पर खिलने वाले फूलों को चुन लो
    इस से पहले
    कि वो मुरझा जाएँ
    Read Full
    Javed Nadeem
    6
    0 Likes
    "दुनिया में कोई किसी से मोहब्बत नहीं करता"
    दुनिया में कोई किसी से मोहब्बत नहीं करता
    हर शख़्स अपनी ज़ात से मोहब्बत करता है
    दरख़्त की शाख़ें रौशनी की तरफ़ लपकती हैं
    तो जड़ें नमी की
    हम ने अपने गिर्द ख़ुद-ग़र्ज़ी का जाल बिछा रखा है
    दोस्ती मोहब्बत स्वार्थ के ही मुख़्तलिफ़ नाम हैं

    मुझे तुम से मोहब्बत है
    कि वो मेरी ज़रूरत है
    और हर आदमी अपनी ज़रूरत पूरी करता है
    तुम्हें अपनी बीवियों से मोहब्बत है
    कि वो तुम्हारे लिए सहूलियात फ़राहम करती हैं
    और मुझे
    अपने बच्चों से प्यार है
    कि मेरा स्वार्थ बहुत है इन में

    वो मर गया
    मुझे दुख हुआ मैं रो पड़ा
    मैं क्यूँ रोया
    उस से अपने तअल्लुक़ के इज़हार के लिए
    या अपनी उन ज़रूरियात के लिए जो वो पूरी करता था
    या उस के उस किरदार के लिए वो मेरे लिए अदा करता था
    वो अब मेरे लिए कुछ नहीं कर सकेगा
    मैं रोया सिर्फ़ अपने लिए
    Read Full
    Javed Nadeem
    5
    0 Likes
    मर्द दरख़्त है
    औरत बेल
    बेल के बक़ा के लिए दरख़्त का वजूद
    इतना ही ना-गुज़ीर है
    जितने रौशनी और आब
    जो बेल
    दरख़्त के सहारे से महरूम रहती है
    ज़मीन पर फैल कर चरिन्दों की ख़ुराक बन जाती है
    Read Full
    Javed Nadeem
    4
    0 Likes
    "सुख का हुसूल"
    सुख का हुसूल
    और दुख से नजात
    सिर्फ़ दो ही तो मसअले नहीं हैं ज़िंदगी के
    सुख और दुख के बीच भी तो मसअले हैं

    ज़िंदगी को जितना सोचोगे
    उतना उलझाएगी
    मैं आज तक ख़ुद को नहीं समझ सका
    फिर ज़िंदगी
    धूप छाँव का खेल है
    जिस पर सूरज का इख़्तियार है
    अपना नहीं
    Read Full
    Javed Nadeem
    3
    0 Likes
    "तुम्हारा वजूद"
    तुम्हारा वजूद
    एक ख़ाली फ़्रेम है
    ये तुम पर मुनहसिर है
    कि इस में कैसी तस्वीर फ़िट करते हो
    वो तस्वीर
    तुम्हारी अपनी शख़्सियत की होगी
    Read Full
    Javed Nadeem
    2
    0 Likes
    "वो हक़ीक़त"
    वो हक़ीक़त
    जो शरीअ'त से रद्द होती हो
    बातिल है
    इंतिहा-ए-इल्म दो सूरतें इख़्तियार करती है
    अल्लाह का हक़ीक़ी बंदा बना देती है
    या फिर
    इबलीस का पैरव
    तुम्हारे पास तो क़ुरआन है
    गुमरही से बचो
    और सिरात-ए-मुस्तक़ीम पे चल निकलो
    इसी में नजात है
    Read Full
    Javed Nadeem
    1
    0 Likes