दरख़्त अपने फल से पहचाना जाता है
और फल अपने दरख़्त से
और फल अपने दरख़्त से
नेकी बदी एक मेआ'र हैं तुम्हारी शनाख़्त का
कि वो तुम से हैं
और तुम उन से
आईना तो वो ही दिखाएगा
जो उस के मुक़ाबिल होगा
Read Fullकि वो तुम से हैं
और तुम उन से
आईना तो वो ही दिखाएगा
जो उस के मुक़ाबिल होगा
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सफ़र पर निकला मुसाफ़िर पलट कर अपने घर को आ जाता है
ज़मीन दाएरे में घूम कर फिर उसी मक़ाम से अपने सफ़र की इब्तिदा करती है
ज़मीन दाएरे में घूम कर फिर उसी मक़ाम से अपने सफ़र की इब्तिदा करती है
वक़्त एक तेज़ रफ़्तार घोड़ा है
जो हाल को माज़ी में तब्दील करता मुस्तक़बिल की तरफ़ दौड़ा चला जा रहा है
कुम्हार का चाक घूम रहा है
और
कुम्हार के मश्शाक़ हाथ मिट्टी से मुख़्तलिफ़ पैकर तराश रहे हैं
तहज़ीब-ओ-तमद्दुन इंतिहा को पहुँच कर फिर अपनी इब्तिदा को पलटते हैं
तुम्हारी पसंद ना-पसंद पर तुम्हारे अस्लाफ़ असर-अंदाज़ हैं
आदमी अपने संस्कारों से बँधा है
ये काल-चक्र
कुम्हार का घूमता हुआ पहिया
तुम्हारी तहक़ीक़-ए-तज्दीद है तुम्हारे पहलों की
हर मुकम्मल ना-मुकम्मल है
हर तख़्लीक़
एक तजस्सुस ना-मुकम्मल से मुकम्मल की तरफ़
ज़िंदगी
इकाई में इकाई के जम्अ' का अमल
ला-महदूद तक
Read Fullजो हाल को माज़ी में तब्दील करता मुस्तक़बिल की तरफ़ दौड़ा चला जा रहा है
कुम्हार का चाक घूम रहा है
और
कुम्हार के मश्शाक़ हाथ मिट्टी से मुख़्तलिफ़ पैकर तराश रहे हैं
तहज़ीब-ओ-तमद्दुन इंतिहा को पहुँच कर फिर अपनी इब्तिदा को पलटते हैं
तुम्हारी पसंद ना-पसंद पर तुम्हारे अस्लाफ़ असर-अंदाज़ हैं
आदमी अपने संस्कारों से बँधा है
ये काल-चक्र
कुम्हार का घूमता हुआ पहिया
तुम्हारी तहक़ीक़-ए-तज्दीद है तुम्हारे पहलों की
हर मुकम्मल ना-मुकम्मल है
हर तख़्लीक़
एक तजस्सुस ना-मुकम्मल से मुकम्मल की तरफ़
ज़िंदगी
इकाई में इकाई के जम्अ' का अमल
ला-महदूद तक
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कल जो गुज़र गया
एक ख़्वाब था ख़्वाब जो टूट गया
एक ख़्वाब था ख़्वाब जो टूट गया
आईने की तरह
और टूटे आईने की किर्चियाँ समेटना हाथों को लहू-लुहान कर देगा
कल आने वाला
अब्र का एक पारा है
जो तुम्हारी ज़मीनों पर बरसे बग़ैर भी गुज़र सकता है
वो तुम्हारी मौहूम उम्मीदों का साया है
और साया कब किस का हो पाया है
तुम साए को पकड़ने की कोशिश मत करो
कि मुबहम उम्मीदों की ना-पुख़्ता शाख़ें
ख़ुशी से फूल नहीं खिला सकतीं
आज
आज तुम्हारा अपना है
तुम्हारी मुट्ठी के सिक्के की तरह
आज के पौदों पर खिलने वाले फूलों को चुन लो
इस से पहले
कि वो मुरझा जाएँ
Read Fullऔर टूटे आईने की किर्चियाँ समेटना हाथों को लहू-लुहान कर देगा
कल आने वाला
अब्र का एक पारा है
जो तुम्हारी ज़मीनों पर बरसे बग़ैर भी गुज़र सकता है
वो तुम्हारी मौहूम उम्मीदों का साया है
और साया कब किस का हो पाया है
तुम साए को पकड़ने की कोशिश मत करो
कि मुबहम उम्मीदों की ना-पुख़्ता शाख़ें
ख़ुशी से फूल नहीं खिला सकतीं
आज
आज तुम्हारा अपना है
तुम्हारी मुट्ठी के सिक्के की तरह
आज के पौदों पर खिलने वाले फूलों को चुन लो
इस से पहले
कि वो मुरझा जाएँ
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"दुनिया में कोई किसी से मोहब्बत नहीं करता"
दुनिया में कोई किसी से मोहब्बत नहीं करता
हर शख़्स अपनी ज़ात से मोहब्बत करता है
दरख़्त की शाख़ें रौशनी की तरफ़ लपकती हैं
तो जड़ें नमी की
हम ने अपने गिर्द ख़ुद-ग़र्ज़ी का जाल बिछा रखा है
दोस्ती मोहब्बत स्वार्थ के ही मुख़्तलिफ़ नाम हैं
मुझे तुम से मोहब्बत है
कि वो मेरी ज़रूरत है
और हर आदमी अपनी ज़रूरत पूरी करता है
तुम्हें अपनी बीवियों से मोहब्बत है
कि वो तुम्हारे लिए सहूलियात फ़राहम करती हैं
और मुझे
अपने बच्चों से प्यार है
कि मेरा स्वार्थ बहुत है इन में
वो मर गया
मुझे दुख हुआ मैं रो पड़ा
मैं क्यूँ रोया
उस से अपने तअल्लुक़ के इज़हार के लिए
या अपनी उन ज़रूरियात के लिए जो वो पूरी करता था
या उस के उस किरदार के लिए वो मेरे लिए अदा करता था
वो अब मेरे लिए कुछ नहीं कर सकेगा
मैं रोया सिर्फ़ अपने लिए
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दरख़्त की शाख़ें रौशनी की तरफ़ लपकती हैं
तो जड़ें नमी की
हम ने अपने गिर्द ख़ुद-ग़र्ज़ी का जाल बिछा रखा है
दोस्ती मोहब्बत स्वार्थ के ही मुख़्तलिफ़ नाम हैं
मुझे तुम से मोहब्बत है
कि वो मेरी ज़रूरत है
और हर आदमी अपनी ज़रूरत पूरी करता है
तुम्हें अपनी बीवियों से मोहब्बत है
कि वो तुम्हारे लिए सहूलियात फ़राहम करती हैं
और मुझे
अपने बच्चों से प्यार है
कि मेरा स्वार्थ बहुत है इन में
वो मर गया
मुझे दुख हुआ मैं रो पड़ा
मैं क्यूँ रोया
उस से अपने तअल्लुक़ के इज़हार के लिए
या अपनी उन ज़रूरियात के लिए जो वो पूरी करता था
या उस के उस किरदार के लिए वो मेरे लिए अदा करता था
वो अब मेरे लिए कुछ नहीं कर सकेगा
मैं रोया सिर्फ़ अपने लिए
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