"वो हक़ीक़त"वो हक़ीक़तजो शरीअ'त से रद्द होती होबातिल हैइंतिहा-ए-इल्म दो सूरतें इख़्तियार करती हैअल्लाह का हक़ीक़ी बंदा बना देती हैया फिरइबलीस का पैरवतुम्हारे पास तो क़ुरआन हैगुमरही से बचोऔर सिरात-ए-मुस्तक़ीम पे चल निकलोइसी में नजात है— Javed Nadeem