Javed Nadeem

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Javed Nadeem shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Javed Nadeem's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Shayari
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  • Nazm
दिन के उजाले की कोई हक़ीक़त तो रात का अंधेरा भी वजूद रखता है
हम हवा को छू नहीं सकते हवा हमें छूती है
मैं अगर तुम से नफ़रत करता हूँ तो मेरे दिल में तुम्हारे लिए मोहब्बत
भी है
मोहब्बत और नफ़रत दोनों ही ज़िंदगी हैं
जिस तरह रात और दिन
आसाइश अगर ज़िंदगी है तो बे-माएगी और मसाइब भी
जागना ज़िंदगी है तो नींद और नींद में ख़्वाबों का आना भी
समुंदर पहाड़ अगर काएनात का जुज़ हैं तो हमारे दिल की धड़कनें भी
पैदाइश ज़िंदगी है तो मौत का आख़िरी पल भी
इन सब चीज़ों को क्या तुम ज़िंदगी से अलग कर सकते हो

ज़िंदगी में ज़िंदगी समाई हुई है
ज़िंदगी कभी फ़ना नहीं होती
ये शक्लें बदल कर तुम्हारे सामने आएगी
पैदाइश और मौत ज़िंदगी के ही दो नाम हैं
सफ़र की इब्तिदा-ओ-इंतिहा
सफ़र जो ज़िंदगी है
और ज़िंदगी काएनात की दूसरी बड़ी सच्चाई
मौज अंदर मौज समुंदर की तरह असरार-ए-ख़ज़ाइन लिए हुए
तुम अगर इस दूसरी बड़ी सच्चाई को समझ सके
तो
काएनात की पहली बड़ी सच्चाई तुम पर ख़ुद-बख़ुद आश्कार हो जाएगी
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सफ़र पर निकला मुसाफ़िर पलट कर अपने घर को आ जाता है
ज़मीन दाएरे में घूम कर फिर उसी मक़ाम से अपने सफ़र की इब्तिदा करती है
वक़्त एक तेज़ रफ़्तार घोड़ा है
जो हाल को माज़ी में तब्दील करता मुस्तक़बिल की तरफ़ दौड़ा चला जा रहा है
कुम्हार का चाक घूम रहा है
और
कुम्हार के मश्शाक़ हाथ मिट्टी से मुख़्तलिफ़ पैकर तराश रहे हैं
तहज़ीब-ओ-तमद्दुन इंतिहा को पहुँच कर फिर अपनी इब्तिदा को पलटते हैं
तुम्हारी पसंद ना-पसंद पर तुम्हारे अस्लाफ़ असर-अंदाज़ हैं
आदमी अपने संस्कारों से बँधा है
ये काल-चक्र
कुम्हार का घूमता हुआ पहिया
तुम्हारी तहक़ीक़-ए-तज्दीद है तुम्हारे पहलों की
हर मुकम्मल ना-मुकम्मल है
हर तख़्लीक़
एक तजस्सुस ना-मुकम्मल से मुकम्मल की तरफ़
ज़िंदगी
इकाई में इकाई के जम्अ का अमल
ला-महदूद तक
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सूरज की तपिश पानी को बुख़ारात में तब्दील करके फ़ज़ा में उड़ा देती
माहौल की बुरूदत जब शिद्दत इख़्तियार कर लेती है तो ज़मीन बर्फ़ के
बोझ तले कसमसाने लगती है
मैं तुम से ये नहीं कहूँगा
तुम ने ऐसा क्यों किया
तुम ऐसा क्यों करते हो
तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए
ज़िंदगी के हक़ाएक़ से फ़रार कभी सुकून नहीं दे सकता
हक़ीक़ी सुरूर उन्हें क़ुबूल कर लेने में है
अगर तुम समझने वाले हो समझ जाओगे
तुम
ठहरा हुआ पानी हो
मैं तुम्हें बहाव में देखना चाहता हूँ
तुम्हारी रवानी बड़ी दिलकश होगी
अगर तुम बह सके

ज़िंदगी के मसाइल
तुम्हारी ज़ात की सत्ह पर उगे पेड़ पौदे हैं
पेड़ सत्ह से क़द-आवर नज़र आते हैं
मगर
बुलंदी से छोटे
और ख़ूबसूरत भी
तुम अपनी ज़ात में बुलंद हो जाओ
ज़िंदगी के मसाइल छोटे हो जाएँगे
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हमारी ख़्वाहिशात हमारी ज़रूरियात की पैदावार हैं
ख़्वाहिशात की तकमील ख़ुशी देती है
और अदम-ए-तकमील रंज
ख़ुशी और रंज क्या है
हमारे अपने मिज़ाज की जम्अ-तफ़रीक़
क्या तुम ने कभी किसी के लिए मौत की ख़्वाहिश की है
मौत में एक ख़ुशी पोशीदा है
एक स्वार्थ निहित है
तुम्हारी ज़िंदगी स्वार्थ पे क़ाएम है
तुम जब भी मौत चाहोगे अपने स्वार्थ के लिए चाहोगे
यूँ कोई मौत को गले लगाता है

मैं सोचता हूँ
ज़िंदगी की साँसों ने
मेरे बदन को हिद्दत के सिवा क्या दिया है
धरती पर एक बोझ से ज़ियादा नहीं रहा है मेरा वजूद
आख़िर धरती कब तक मेरा बोझ बर्दाश्त करेगी
वक़्त आ गया है कि मौत मुझे गले लगा ले
मैं धरती का बोझ कम करना चाहता हूँ
या ज़िंदगी के बोझ से ख़ुद छुटकारा हासिल करना चाहता हूँ
मैं जानता हूँ
मेरी मौत से संसार अपनी रफ़्तार धीमी नहीं कर लेगा
वक़्त ठहर नहीं जाएगा
कि मैं किसी के लिए ज़िंदा नहीं था
और मेरी मौत भी
अपने लिए है
ख़ालिस अपने लिए
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दुनिया में कोई किसी से मोहब्बत नहीं करता
हर शख़्स अपनी ज़ात से मोहब्बत करता है
दरख़्त की शाख़ें रौशनी की तरफ़ लपकती हैं
तो जड़ें नमी की
हम ने अपने गिर्द ख़ुद-ग़र्ज़ी का जाल बिछा रखा है
दोस्ती मोहब्बत स्वार्थ के ही मुख़्तलिफ़ नाम हैं

मुझे तुम से मोहब्बत है
कि वो मेरी ज़रूरत है
और हर आदमी अपनी ज़रूरत पूरी करता है
तुम्हें अपनी बीवियों से मोहब्बत है
कि वो तुम्हारे लिए सहूलियात फ़राहम करती हैं
और मुझे
अपने बच्चों से प्यार है
कि मेरा स्वार्थ बहुत है इन में

वो मर गया
मुझे दुख हुआ मैं रो पड़ा
मैं क्यों रोया
उस से अपने तअल्लुक़ के इज़हार के लिए
या अपनी उन ज़रूरियात के लिए जो वो पूरी करता था
या उस के उस किरदार के लिए वो मेरे लिए अदा करता था
वो अब मेरे लिए कुछ नहीं कर सकेगा
मैं रोया सिर्फ़ अपने लिए
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