@Salmanashhadisahil
Salman ashhadi sahil shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Salman ashhadi sahil's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया
कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ
उसकी चाहत में भी इख़लास नहीं था शायद
और कुछ हम भी उसे दिल से नहीं चाह सके
अब तो बस तन्हाइयाँ ही साथ रहती हैं सदा
याद पड़ता है कि पहले रौनक़-ए -महफ़िल थे हम
हमारे शेर को बस शेर मत समझ लेना
हम अपने दर्द को ख़ून-ए-जिगर से लिखते हैं
मैं किस से बात करूँ किस के साथ दुख बाँटूं
मिरे मिज़ाज का कोई नहीं है दुनिया में
किसको फ़ुर्सत है किसी की नाज़ बरदारी करे
आदमी हर एक अपने आप में मसरूफ़ है
भटके तमाम उम्र हम आवारगान-ए-इश्क़
लेकिन किसी के दिल में ठिकाना नहीं मिला
रोज़ हम हसरत - ए - दीदार लिए आँखों में
बन के पागल तिरी गलियों में फिरा करते हैं
बहुत अफ़सोस होता है ख़ज़ाने को लुटा बैठे
मोहब्बत जिस से करते हैं उसी को हम गँवा बैठे