Salman ashhadi sahil

Salman ashhadi sahil

@Salmanashhadisahil

Salman ashhadi sahil shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Salman ashhadi sahil's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया
कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ

Salman ashhadi sahil

उसकी चाहत में भी इख़लास नहीं था शायद
और कुछ हम भी उसे दिल से नहीं चाह सके

Salman ashhadi sahil

फिर यूँ हुआ कि शहर की रौनक़ को छोड़कर
हम ऐसे लोग गाँव की जानिब निकल पड़े

Salman ashhadi sahil

बस एक बार हो तेरी निगाह मेरी तरफ़
फिर उसके बाद मुझे कोई शै नहीं दरकार

Salman ashhadi sahil

अब तो बस तन्हाइयाँ ही साथ रहती हैं सदा
याद पड़ता है कि पहले रौनक़-ए -महफ़िल थे हम

Salman ashhadi sahil

याद करने की सहूलत तो मयस्सर थी मगर
भूल जाना ही उसे मैंने ज़रूरी समझा

Salman ashhadi sahil

हमारे शेर को बस शेर मत समझ लेना
हम अपने दर्द को ख़ून-ए-जिगर से लिखते हैं

Salman ashhadi sahil

मैं किस से बात करूँ किस के साथ दुख बाँटूं
मिरे मिज़ाज का कोई नहीं है दुनिया में

Salman ashhadi sahil

किसको फ़ुर्सत है किसी की नाज़ बरदारी करे
आदमी हर एक अपने आप में मसरूफ़ है

Salman ashhadi sahil

भटके तमाम उम्र हम आवारगान-ए-इश्क़
लेकिन किसी के दिल में ठिकाना नहीं मिला

Salman ashhadi sahil

रोज़ हम हसरत - ए - दीदार लिए आँखों में
बन के पागल तिरी गलियों में फिरा करते हैं

Salman ashhadi sahil

बहुत अफ़सोस होता है ख़ज़ाने को लुटा बैठे
मोहब्बत जिस से करते हैं उसी को हम गँवा बैठे

Salman ashhadi sahil