मर्द दरख़्त है
औरत बेल
बेल के बक़ा के लिए दरख़्त का वजूद
इतना ही ना-गुज़ीर है
जितने रौशनी और आब
जो बेल
दरख़्त के सहारे से महरूम रहती है
ज़मीन पर फैल कर चरिन्दों की ख़ुराक बन जाती है
— Javed Nadeem
औरत बेल
बेल के बक़ा के लिए दरख़्त का वजूद
इतना ही ना-गुज़ीर है
जितने रौशनी और आब
जो बेल
दरख़्त के सहारे से महरूम रहती है
ज़मीन पर फैल कर चरिन्दों की ख़ुराक बन जाती है
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