Fani Badayuni

Fani Badayuni

@fani-badayuni

Fani Badayuni shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Fani Badayuni's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

उम्मीद के वादों से जी कुछ तो बहलता था अब ये भी तेरे ग़म को मंज़ूर नहीं होते — Fani Badayuni
हर मुसीबत का दिया एक तबस्सुम से जवाब इस तरह गर्दिश-ए-दौराँ को रुलाया मैं ने — Fani Badayuni
इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का ज़िन्दगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का — Fani Badayuni
हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी' ज़िन्दगी नाम है मर मर के जिए जाने का — Fani Badayuni
न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम — Fani Badayuni
अब न काँटों ही से कुछ लाग न फूलों से लगाओ हम ने देखा है तमाशा तेरी रा'नाई का — Fani Badayuni
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है — Fani Badayuni
सुने जाते न थे तुम सेे मिरे दिन रात के शिकवे कफ़न सरकाओ मेरी बे-ज़बानी देखते जाओ — Fani Badayuni
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है मौत मिले तो मुफ़्त न लूँ हस्ती की क्या हस्ती है — Fani Badayuni
यूँँ न क़ातिल को जब यक़ीं आया हम ने दिल खोल कर दिखाई चोट — Fani Badayuni

Ghazal

ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का एक गोशा है ये दुनिया इसी वीराने का इक मुअ'म्मा है समझने का न समझाने का ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का हुस्न है ज़ात मिरी इश्क़ सिफ़त है मेरी हूँ तो मैं शम्अ' मगर भेस है परवाने का का'बे को दिल की ज़ियारत के लिए जाता हूँ आस्ताना है हरम मेरे सनम-ख़ाने का मुख़्तसर क़िस्सा-ए-ग़म ये है कि दिल रखता हूँ राज़-ए-कौनैन ख़ुलासा है इस अफ़्साने का ज़िंदगी भी तो पशेमाँ है यहाँ ला के मुझे ढूँडती है कोई हीला मिरे मर जाने का तुम ने देखा है कभी घर को बदलते हुए रंग आओ देखो न तमाशा मिरे ग़म-ख़ाने का अब इसे दार पे ले जा के सुला दे साक़ी यूँँ बहकना नहीं अच्छा तिरे मस्ताने का दिल से पहुँची तो हैं आँखों में लहू की बूँदें सिलसिला शीशे से मिलता तो है पैमाने का हड्डियाँ हैं कई लिपटी हुई ज़ंजीरों में लिए जाते हैं जनाज़ा तिरे दीवाने का वहदत-ए-हुस्न के जल्वों की ये कसरत ऐ इश्क़ दिल के हर ज़र्रे में आलम है परी-ख़ाने का चश्म-ए-साक़ी असर-ए-मय से नहीं है गुल-रंग दिल मिरे ख़ून से लबरेज़ है पैमाने का लौह दिल को ग़म-ए-उल्फ़त को क़लम कहते हैं कुन है अंदाज़-ए-रक़म हुस्न के अफ़्साने का हम ने छानी हैं बहुत दैर-ओ-हरम की गलियाँ कहीं पाया न ठिकाना तिरे दीवाने का किस की आँखें दम-ए-आख़िर मुझे याद आई हैं दिल मुरक़्क़ा' है छलकते हुए पैमाने का कहते हैं क्या ही मज़े का है फ़साना 'फ़ानी' आप की जान से दूर आप के मर जाने का हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी' ज़िंदगी नाम है मर मर के जिए जाने का — Fani Badayuni
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है मौत मिले तो मुफ़्त न लूँ हस्ती की क्या हस्ती है आबादी भी देखी है वीराने भी देखे हैं जो उजड़े और फिर न बसे दिल वो निराली बस्ती है ख़ुद जो न होने का हो अदम क्या उसे होना कहते हैं नीस्त न हो तो हस्त नहीं ये हस्ती क्या हस्ती है इज्ज़-ए-गुनाह के दम तक हैं इस्मत-ए-कामिल के जल्वे पस्ती है तो बुलंदी है राज़-ए-बुलंदी पस्ती है जान सी शय बिक जाती है एक नज़र के बदले में आगे मर्ज़ी गाहक की इन दामों तो सस्ती है वहशत-ए-दिल से फिरना है अपने ख़ुदा से फिर जाना दीवाने ये होश नहीं ये तो होश-परस्ती है जग सूना है तेरे बग़ैर आँखों का क्या हाल हुआ जब भी दुनिया बस्ती थी अब भी दुनिया बस्ती है आँसू थे सो ख़ुश्क हुए जी है कि उमडा आता है दिल पे घटा सी छाई है खुलती है न बरसती है दिल का उजड़ना सहल सही बसना सहल नहीं ज़ालिम बस्ती बसना खेल नहीं बसते बसते बस्ती है 'फ़ानी' जिस में आँसू क्या दिल के लहू का काल न था हाए वो आँख अब पानी की दो बूँदों को तरसती है — Fani Badayuni
कुछ बस ही न था वर्ना ये इल्ज़ाम न लेते हम तुझ से छुपा कर भी तिरा नाम न लेते नज़रें न बचाना थीं नज़र मुझ से मिला कर पैग़ाम न देना था तो पैग़ाम न लेते क्या उम्र में इक आह भी बख़्शी नहीं जाती इक साँस भी क्या आप के नाकाम न लेते अब मय में न वो कैफ़ न अब जाम में वो बात ऐ काश तिरे हाथ से हम जाम न लेते क़ाबू ही ग़म-ए-इश्क़ पे चलता नहीं वर्ना एहसान-ए-ग़म-ए-गर्दिश-ए-अय्याम न लेते हम हैं वो बला दोस्त कि गुलशन का तो क्या ज़िक्र जन्नत भी बजाए क़फ़स ओ दाम न लेते ख़ामोश भी रहते तो शिकायत ही ठहरती दिल दे के कहाँ तक कोई इल्ज़ाम न लेते अल्लाह रे मिरे दिल की नज़ाकत का तक़ाज़ा तासीर-ए-मोहब्बत से भी हम काम न लेते तेरी ही रज़ा और थी वर्ना तिरे बिस्मिल तलवार के साए में भी आराम न लेते इक जब्र है ये ज़िंदगी इश्क़ कि 'फ़ानी' हम मुफ़्त भी ये ऐश-ए-ग़म-अंजाम न लेते — Fani Badayuni