Harsh Jani

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@jaaaniyat

Kashyap Jani shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kashyap Jani's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

Ghazal

मैं ऐसा नहीं था, बनाया गया हूँ हसीनों के हाथों, सताया गया हूँ मेरा दिल लगाना तो, मुमकिन नहीं था बड़ी साजिशों से फँसाया गया हूँ मेरी जाँ के सौदे, वो करते हैं यारों मैं इतना भी सस्ता, बनाया गया हूँ ज़हर थी अदा तो, हँसी भी थी क़ातिल मैं ऐसे शिकंजों, में लाया गया हूँ मेरे दिल से खेलो, मेरी जान ले लो तुम्हारा खिलौना बनाया गया हूँ ये जब भी है चाहा, के आज बोलूँ हमेशा के जैसे, दबाया गया हूँ सभी के लबों पर, कहानी थी मेरी ज़माने से मैं अब, भुलाया गया हूँ किए ज़ुल्म जो वो, सितमगर थे ऐसे मैं ज़ुल्मों के हाथों, रुलाया गया हूँ तड़प के सदा आई, मेरे लहू से कज़ा पर भी अपनी, नचाया गया हूँ — Harsh Jani
हज़ार ग़म जिन्हें घेरें शराब क्यूँ न पिएं बता ए साक़ी वो खान-खराब क्यूँ न पिएं उजाड़ कर मुझे लिखा है उस ने मत पीना लिखा है मैं ने भी उस को जवाब क्यूँ न पिएं उन्हें नहीं है कोई हक के ग़म को भूल सकें हो जिन के दिल में ग़म-ओ-इज़्तिराब क्यूँ न पिएं हिसाब किस को हैं देना के कोई अपना नहीं तो फिर जाना बिन तेरे बे-हिसाब क्यूँ न पिएं किसी को ख़ून है पसंद और किसी को हैं पानी हमारा तो है बस यहीं इंतिख़ाब क्यूँ न पिएं भाग भाग के तेरी यादों के बयाबान में थक चुका हूँ हमें भी सराब क्यूँ न पिएं हमारे हाल से किस को ग़रज़ है दुनिया में हज़ार बार पिएँगे हम, ज़नाब क्यूँ न पिएं सुना हैं जाम है नशाद उन की मस्तानी आँखों में तो आज उन को हटा कर नक़ाब क्यूँ न पिएं — Harsh Jani