रब ने रखा है पास क्या
मेरे लिए कुछ ख़ास क्या
ख़ुद को जला मैं आ रहा
ख़ुश हो बचा के घास क्या
तुम तो घड़े के साथ हो
तुम को पता है प्यास क्या
जिस का न बेटा साथ हो
उस माँ से पूछो आस क्या
पत्थर पुकारे इश्क़ को
शीशा करे विश्वास क्या
ऐसे 'जानी' बर्बाद हो
दुनिया न आती रास क्या
— Harsh Jani















