दिलकश ये आँखें, नज़र तीर है कोई

लब, जैसे नज़्मों की तहरीर है कोई

इक बार जो देखे, वो देखे दोबारा
रूहानी सी एक तस्वीर है कोई

यूँ तो यहाँ, और भी हैं हसीं चहरे
पर ये, किसी राँझे की हीर है कोई

वो मरते दम तक करे, आरज़ू जिस की
योद्धा की मनचाही शमशीर है कोई

बिन जिस के मुमकिन नहीं शे'रो-शायरी
शाइ'र के दिल की, हसीं पीर है कोई

— Harsh Jani

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