यादों की वीरानी होगी
क़स
में झूटी खानी होगी
रेल पकड़ के जाओ मिलने
मिलने में आसानी होगी
ख़ाली हाथ मिलोगे उस से
फिर तो आनाकानी होगी
अश्क बहेगा थोड़ा भी गर
आँखों को हैरानी होगी
मुझ से मिलना बातें करना
तेरी तो मनमानी होगी
कम लोगों से मिलना-जुलना
जीने में आसानी होगी
प्यार किया फिर छोड़ दिया
तो सच में ये बेईमानी होगी
बन जाऊँगा जोगी उस का
वो जिस की दीवानी होगी
दिल देना 'जानी' उस को ही
जो जानी पहचानी होगी
— Harsh Jani















