Jafar Abbas Safvi

Jafar Abbas Safvi

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Jafar Abbas Safvi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Jafar Abbas Safvi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
मोहब्बत का फ़साना हम से दोहराया नहीं जाता
बस अब हम से फ़रेब-ए-आरज़ू खाया नहीं जाता

यहाँ तक तो मुझे दस्त-ए-करम पर नाज़ है उन के
अगर अब हाथ फैलाऊँ तो फैलाया नहीं जाता

तमाशा देखने वाले तमाशा बन के रह जाएँ
ब-क़द्र-ए-दर्द तुम से दिल को तड़पाया नहीं जाता

ये आलम है क़फ़स का दर खुला है सेहन-ए-गुलशन में
मगर सय्याद को अब छोड़ कर जाया नहीं जाता

मुझे देखो कि ग़ैरों को भी सीने से लगाता हूँ
मगर तुम से तो अपनों को भी अपनाया नहीं जाता

जो आँखें देख लेती हैं ख़िज़ाँ का दौर फिर उन से
बहारों का फ़रेब-ए-रंग-ओ-बू खाया नहीं जाता

मैं उन को बे-रुख़ी का किस लिए इल्ज़ाम दूँ 'जाफ़र'
अँधेरे में तो अपना दो-क़दम साया नहीं जाता
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Jafar Abbas Safvi
जवानी की उमंगों का यही अंजाम है शायद
चले आओ कि वा'दे की सुहानी शाम है शायद

जो तिश्ना था कभी साक़ी वो तिश्ना-काम है शायद
उसी बाइ'स तो नज़्म-ए-मय-कदा बदनाम है शायद

हँसी के साथ भी आँसू निकल आते हैं आँखों से
ख़ुशी तो मेरी क़िस्मत में बराए-नाम है शायद

जिसे मय-ख़्वार पी के मय-कदे में रक़्स करते हैं
तिरी आँखों की मस्ती साक़ी-ए-गुलफ़ाम है शायद

उड़ाई शम्अ' ने जब ख़ाक-ए-परवाना तो मैं समझा
मोहब्बत करने वालों का यही अंजाम है शायद

जो अब तक मय-कशों के पास मुद्दत से नहीं आई
अभी गर्दिश में ख़ुद ही गर्दिश-ए-अय्याम है शायद

मैं दानिस्ता अब उन के सामने ख़ामोश हूँ 'जाफ़र'
ख़मोशी भी मिरी अब मोरिद-ए-इल्ज़ाम है शायद
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Jafar Abbas Safvi

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