चलेजाइएगामिरीअंजुमनसे
येक्यासुनहूँतुम्हारेदहनसे
बहारोंकोरंगींबनायाहैहमने
कहाँजाएँअहल-ए-चमनहमचमनसे
कहेंकिससेहमकस्मपुर्सीकाआलम
वतनमेंहैंलेकिनग़रीब-उल-वतनसे
मोहब्बतकेतोहफ़ेसमझकरलिएहैं
मिलेजिसक़दररंजदार-ए-मेहनसे
येहीहोगाआख़िरतग़ाफ़ुलकाहासिल
उतरजाओगेएकदिनमेरेमनसे
येमहसूसहोताहैसहरामेंरहकर
तअ'ल्लुक़हीजैसेनहींथाचमनसे
सुनाकरग़ज़लआजमहफ़िलमें'जाफ़र'
मुझेदादलेनीहैअहल-ए-सुख़नसे