Maaham Shah

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Maaham Shah shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Maaham Shah's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

दिल के ज़ख़्मों का कुछ क्या न करो चाक हो जाए तो सिया न करो — Maaham Shah

Ghazal

क्या सुनाऊँ दिल-ए-मुज़्तर का फ़साना तुम को मैं ने चाहा था कभी एक ज़माना तुम को ये जो तुम ईद पे भी आते नहीं लौट के घर कोई छुट्टी का नहीं होता बहाना तुम को बिस्तर-ए-मर्ग पे माँ थी तो न थे सामने तुम बहुत ही महँगा पड़ा है चले जाना तुम को गाँव के कच्चे मकानों में ये पक्के रिश्ते रास आएगा नहीं शहर का खाना तुम को हर महीने ये नए नोट ये ख़त क्या मतलब न मनाओ नहीं आता है मनाना तुम को एक कमरा है किराए का ये बाज़ारी ग़िज़ा शहर में कैसे मिले शाही ठिकाना तुम को आख़िरी ख़त को पढ़ो उस में मिलेगा 'माहम' भूल जाने का उसे कोई बहाना तुम को — Maaham Shah

Nazm

किस की आरज़ू थी मैं किस की हो गई हूँ मैं कि ख़ुद को भी नहीं मिलती कहीं तो खो गई हूँ मैं यही थी चाहती कहना कुछ और ही कह गई हूँ मैं फ़राएज़ तेरे पर्चे में सफ़-ए-अव्वल रही हूँ मैं रहीन-ए-आशिक़ी हूँ मैं मुसलसल टुकड़ों में जी कर मुसलसल मर रही हूँ मैं है सब से इत्तिफ़ाक़ अपना कि ख़ुद से लड़ रही हूँ मैं ये इज़्ज़त बोझ है शायद जहाँ पर दब गई हूँ मैं हर इक शब जागते गुज़री कि सोने कब गई हूँ मैं सदा तहज़ीब भी हूँ मैं सदा तहरीक भी हूँ मैं कभी तू ग़ौर तो कर ले कहीं तफ़रीक़ भी हूँ मैं कभी बेज़ार भी हूँ मैं कभी ग़म-ख़्वार भी हूँ मैं अगर कुछ वक़्त पड़ जाए सुनो तलवार भी हूँ मैं खड़ी है जो कि तूफ़ाँ में वही चट्टान भी हूँ मैं मुकम्मल एक नाज़ुक सा कोई गुल-दान भी हूँ मैं ऐ इब्न-ए-आदम-ए-दावर ख़याल-ए-बिंत-ए-हव्वा कर — Maaham Shah