महीने तक तेरा रेज़ा बना होगा
बरस में फिर कहीं चेहरा बना होगा
ख़ुदा के ज़ेहन में कश्मीर होगा तब
तेरे चेहरे का तब नक़्शा बना होगा
हज़ारों की कहीं क़िस्मत मिलाने से
जिसे तू चाहे वो लड़का बना होगा
तेरा चेहरा है साकिन पानी पे भी तो
हमारे ही लिए शीशा बना होगा
तुझे पाकर यूँँ ही हाकिम बनेगा वो
हमारे वास्ते पैसा बना होगा
मैं ख़ुश हूँ बात होती है मगर ग़म है
मेरी क़िस्मत में तू कितना बना होगा
मैं आया जो तेरी शादी में फिर तेरा
मेरी अर्थी पे भी आना बना होगा
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