vo meri baahon mein be-fikr mulawwis hui hai | वो मिरी बाहों में बे-फ़िक्र मुलव्विस हुई है

  - Raj

वो मिरी बाहों में बे-फ़िक्र मुलव्विस हुई है
कब्र पे हार कोई फूलों का रक्खा हुआ है

  - Raj

Qabr Shayari

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    मौत को हम ने कभी कुछ नहीं समझा मगर आज
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    Astitwa Ankur
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    कोई किसी की बाँहों में पूरा आ रहा था
    कोई किसी के हाथों से निकले जा रहा था

    वो जो किसी नज़र पे जी-जाँ से जा लगे थे
    उनके लिए में जाँ-बर काजल बना रहा था

    मेरा वो नाम लेके वापस से आ रही थी
    मुझको नज़र सराबों में सहरा आ रहा था

    उसने बिना पढ़े ही ख़त मेरे थे सँभाले
    वो बे-वफ़ा रहा था पर बा-वफ़ा रहा था

    मैं चुप करा रहा था वो रोये जा रही थी
    वो चुप करा रही थी , मैं रोये जा रहा था

    जब दूर कोई बन्दा सर्दी से मर गया था
    तब दूर कोई बन्दा चादर चढ़ा रहा था

    उसकी यहाँ विदाई जब बरपा हो रही थी
    तब कोई गाड़ियों में सोफ़े चढ़ा रहा था
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    Raj
    बस एक दिल की ज़रूरत है हादसे के लिए
    हजर हों दो तो ही चिंगारियाँ बनाते हैं
    Raj
    ये जो लोग इतनी उल्फ़त बरसाते हैं
    इतने पत्थर साथ कहाँ से लाते हैं
    Raj
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    बात है धोके की ईजाद से पहले
    बात है ताले की ईजाद से पहले

    इक आवाज़ में दौड़े आते थे लोग
    बात है जूते की ईजाद से पहले

    मंदिर मस्जिद गिरजाघर होते थे
    हर इक टीके की ईजाद से पहले

    दूर रखे होंगे झीलों से पत्थर
    तब आईने की ईजाद से पहले

    लोग तजरबे से आगे तक आए
    पढ़ने लिखने की ईजाद से पहले

    तेज़ हवा का डेरा होगा जग में
    उसके झुमके की ईजाद से पहले

    मेरी ख़ामी पे चादर चढ़ती थी
    तेरे क़िस्से की ईजाद से पहले

    प्यार रहा होगा लोगों में कितना
    सिक्के पैसे की ईजाद से पहले

    अश्क छिपाना भी फ़न होता होगा
    काले चश्मे की ईजाद से पहले

    लोग लगाते होंगें अंदाज़े राज
    तब दरवाज़े की ईजाद से पहले
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    Raj
    ग़म को गद-गद करते हैं
    आप भी ना, हद करते हैं
    Raj

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